
रेल दुर्घटना में मुआवजे की 90 प्रतिशत राशि रोकना गलत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेलवे दुर्घटना में मौत या घायल होने पर रेलवे दावा अधिकरण की ओर से मुआवजे की 90 प्रतिशत राशि बैंक में एफडी करने और केवल 10 प्रतिशत राशि जारी करने की व्यवस्था को गलत माना है। कोर्ट ने वयस्क दावेदार को पूरी मुआवजा राशि जारी करने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने वाराणसी के राम नरेश सिंह और अन्य की याचिका के साथ संलग्न सत्रह याचिकाओं पर यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि साक्षरता या आर्थिक आधार पर दावेदारों के बीच मुआवजे में अंतर करना समानता के अधिकार का उल्लंघन है। इस दौर में यह अनुचित है कि कोई गरीब या निरक्षर व्यक्ति अपनी राशि का प्रबंधन नहीं कर सकता।
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हाईकोर्ट ने मुआवजे का 10 प्रतिशत जारी करने और बाकी एफडी में रखने को तर्कहीन करार दिया। कोर्ट ने कहा कि बालिग अपने पैसों के उपयोग का निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होता है। अधिकरण या राज्य शर्तें नहीं थोप सकता। इसी के साथ कोर्ट ने अधिकरण को मुआवजा राशि दावेदार के सत्यापित खाते में जारी करने का आदेश दिया। पहले से एफडी में रखी गई राशि भी तत्काल जारी करने के लिए कहा।
Source: Newsline Features And Press Agency, Agra



