कानून के तहत राहत पाना पत्नी का कानूनी अधिकार

ADVERTISEMENT
Digital Chacha Advertisement

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल और न्यायमूर्ति योगेश जसवाल की खंडपीठ ने एक पारिवारिक मामले स्पष्ट किया है कि यदि कोई परेशान पत्नी अपने अधिकारों के लिए कानूनी रास्ता चुनती है, तो इसे पति के प्रति मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता।
पीठ ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में कोई भी विवाहित महिला अपने बच्चों के साथ बिना किसी गंभीर या प्रतिकूल परिस्थिति के अपना वैवाहिक घर और पति का साथ अपनी मर्जी से नहीं छोड़ती है।
‌ पीठ ने कहा कि न्यायालय में घरेलू हिंसा कानून के तहत राहत पाना और भरण पोषण की मांग करना पत्नी का कानूनी अधिकार है। इसे पति के प्रति मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता।

Source: Newsline Features And Press Agency, Agra

ADVERTISEMENT
Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *