इलाहाबाद हाईकोर्ट के पांच महत्वपूर्ण आदेश-सार

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@ इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस प्रकाश पाडिया और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने कहा कि सरफेसी एक्ट की धारा 14 के अंतर्गत बंधक संपत्ति का कब्जा लेने की कार्रवाई से पहले कर्जदार को नोटिस देकर सुनवाई का अवसर देना जरूरी नहीं है।
@ इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस संदीप जैन की एकल पीठ ने कहा कि नाबालिक की अभिरक्षा का निर्णय केवल माता-पिता के कानूनी अधिकारों के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसमें बच्चों का कल्याण सबसे ऊपर होना चाहिए।
@ इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने कहा कि केवल सरकारी कार्यालय से रिकॉर्ड या पत्रावली न मिलने के आधार पर किसी की नियुक्ति को अमान्य या फर्जी घोषित नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने बिना सुने वेतन रोकने के आदेश को रद्द कर दिया।
@ इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस गरिमा प्रसाद की एकल पीठ में कहा कि वसीयत की वैधता उसके वास्तविक निष्पादन और वसीयतकर्ता की मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर विवाद होने पर उसका अंतिम निर्णय केवल सक्षम सिविल न्यायालय ही कर सकता है। राजस्व अधिकारी को वसीयत की वैधता पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं है।
@ इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस विकास बुधवार की एकल पीठ ने कहा कि किसी अंतरिम आदेश के प्रभावी रहने के दौरान उसका उल्लंघन किए जाने के आरोप में चल रही अवमानना कार्रवाई केवल इस आधार पर समाप्त नहीं हो सकती कि संबंधित मुकदमा बाद में खारिज हो गया।

Source: Newsline Features And Press Agency, Agra

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