
गवाहों के मुकरने पर भी मृत्यु पूर्व बयान विश्वसनीय
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि कई बार अभियोजन पक्ष के गवाहों को भावनात्मक दबाव, आर्थिक व अन्य लाभ देकर अपने पक्ष में कर लिया जाता है। ऐसे में केवल गवाहों के मुकर जाने मात्र से ही मृत्यु पूर्व बयान को पूरी तरह अविश्वसनीय नहीं माना जा सकता।
इस टिप्पणी के साथ पीठ ने बदायूं के उझानी निवासी संतोष की पुत्री की जलने से मौत के मामले में पति और सास-ससुर की आजीवन कारावास की सजा को यथावत रखा, जबकि दो अन्य आरोपियों की पहचान साबित नहीं होने पर उनकी दोषसिद्धि को रद्द कर दिया।
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Source: Newsline Features And Press Agency, Agra



