
हिमाचल प्रदेश में रसभरी की नई प्रजाति की हुई खोज
बॉटनिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया ने हिमाचल प्रदेश के सोलन में रसभरी की नई प्रजाति की खोज की है। यह प्रजाति सड़क किनारे घास वाले क्षेत्र में लगभग 1,327 मीटर की ऊंचाई पर पाई गई है और इसे फिजैलिस हिमाचलेंसिंस नाम दिया गया है। हिमाचल प्रदेश के एक शोध पत्र में इस नए पौधे का खुलासा किया गया है।
हिमाचल प्रदेश के बागवानी विभाग के निदेशक डॉक्टर सतीश शर्मा के अनुसार प्रदेश में इस पौधे की नई प्रजाति का मिलना एक उपलब्धि हो सकता है। राज्य के बागवानों के लिए यह खोज उपयोगी बन सकती है। बॉटनिकल सर्वे आफ इंडिया की रिपोर्ट को देखने के बाद इसके पौधों को बागवानों तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
निदेशक ने बताया कि रसभरी को घर की छत, बालकनी ,आंगन में गमले या ग्रो बैग में भी उगाया सकता है। इसके लिए कम से कम 10 से 20 लीटर क्षमता का गमला उपयोगी माना जाता है। रसभरी पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसमें विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट, कैरॉटिनाइड और अन्य जैव सक्रिय तत्व पाए जाते हैं। पारंपरिक चिकित्सा में रसभरी की कुछ प्रजातियों का उपयोग सूजन, दर्द, बुखार और पाचन संबंधी समस्याओं में किया जाता रहा है।
Source: Newsline Features And Press Agency, Agra



