
गैंगस्टर एक्ट का हो सकता है दुरूपयोग : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एवं असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों पर सवाल उठते हुए कहा है कि इसका दुरुपयोग हो सकता है।
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति को केवल गैंगस्टर बता कर उस सजा नहीं दी जा सकती। आपराधिक गिरोहों के खतरे पर रोक लगनी चाहिए, लेकिन मकसद सही होने से गलत तरीका सही नहीं हो जाता, खासकर तब, जब कोई ऐसा दंडात्मक कानून बनाया जा रहा हो, जो नागरिकों की आज़ादी में दखल देता हो।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गैंगस्टर एक्ट के तहत आरोपी को लंबे समय तक बिना मुकदमे के हिरासत में रखने की स्थिति बन सकती है, जो एहतियाती हिरासत जैसी होगी। सामाजिक खतरा कितना भी गंभीर हो, उसे रोकने के नाम पर व्यक्ति के खिलाफ मनमानी कार्रवाई नहीं की जा सकती।
Source: Newsline Features And Press Agency, Agra



