अभिरक्षा के मामले में बच्चे का कल्याण महत्वपूर्ण : हाईकोर्ट

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इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने कहा है कि पिता बच्चे का प्राकृतिक अभिभावक होता है। जब तक उसे नाबालिग संतान का अभिभावक बनने के लिए अयोग्य घोषित नहीं कर दिया जाता, तब तक उसे बेटी की अभिरक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।
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हाईकोर्ट ने प्रयागराज निवासी अभिषेक की अपील पर ये आदेश देते हुए कहा कि अभिरक्षा के मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू बच्चे का कल्याण है।

Source: Newsline Features And Press Agency, Agra

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