
अब बिना बायोप्सी के भी हो सकेगी यकृत रोगों की जांच
खानपान और अनियमित जीवनचर्या के चलते मोटापे के साथ यकृत में चर्बी जमा होना एक आम समस्या है। जो कुछ लोगों में लापरवाही एवं इलाज में देरी की वजह से यकृत में फाइब्रोसिस की परेशानी देता है। गंभीर स्थिति में लिवर को काफी नुकसान हो सकता है। ऐसे मरीजों की पहचान आसान बनाने के लिए एम्स दिल्ली के विशेषज्ञों ने एक नया खतरे का अंक तैयार किया है। इसके अंतर्गत बगैर बायोप्सी के भी इस खतरे की पहचान की जा सकती है।
मोटापे और यकृत में चर्बी की समस्या वाले 189 मरीजों के यकृत पर किए गए अध्ययन के दौरान सर्जरी में इनके यकृत का छोटा हिस्सा लेकर जांच की गई ताकि बीमारी की असली स्थिति का पता चल सके। जांच में 189 में से 33 मरीजों में यकृत की गंभीर फाइब्रोसिस मिली।
एम्स के विशेषज्ञों के अनुसार अब बिना बायोप्सी के भी यकृत में फाइब्रोसिस के खतरे की पहचान की जा सकती है। इसमें यकृत की कठोरता, रक्त की विशेष जांच और प्लेटलेट्स की संख्या को एक साथ देखा जाता है। इसके परिणाम भी अच्छे मिले हैं।
Source: Newsline Features And Press Agency, Agra



