
वसीयत रद्द करने के लिए ठोस सबूत जरूरी : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की एक पीठ ने कहा है कि रजिस्टर्ड वसीयत केवल संदेह या आरोपों के आधार पर रद्द नहीं की जा सकती। इसके लिए ठोस सबूत देना जरूरी है।
कोर्ट ने कहा कि वसीयत कर्ता के वृद्ध होने एवं उसके द्वारा अनुचित दबाव व प्रभाव में आकर साथ रहने वाले बेटे के नाम संपत्ति करने के दावे को बिना ठोस सबूत के नहीं माना जा सकता।
पीठ ने कहा कि केवल पिता और पुत्र का संबंध और पिता की अधिक उम्र अपने आप में अनुचित प्रभाव साबित नहीं करती।
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Source: Newsline Features And Press Agency, Agra



