
अब लक्षण देखकर नहीं संक्रमण के आधार पर होगा इलाज
नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने संक्रामक बीमारियों की पहचान और उपचार को अधिक सटीक बनाने के लिए देश भर के डॉक्टरों और महामारी विशेषज्ञों के साथ बैठक करके 233 तरह के कीटाणुओं की प्राथमिकता सूची तैयार की है। इसका उद्देश्य मरीज के केवल लक्षण देखकर दवा देने के बजाय संभावित वायरस, बैक्टीरिया या परजीवी की पहचान कर उसके आधार पर इलाज तय करना है।
इस व्यवस्था में बुखार, खांसी, सांस की तकलीफ, दस्त, शरीर पर दाने या लिम्फ नोड्स में सूजन जैसे लक्षणों के आधार पर संभावित संक्रमणों की जांच को प्राथमिकता दी जाएगी। अचानक आने वाले बुखार में मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड, स्क्रब टाइफस, फ्लू, लेप्टोस्पाइरा और चिकनगुनिया जैसे संक्रमणों को प्राथमिकता में रखा गया है। वहीं बुखार के साथ खांसी और सांस लेने में परेशानी होने पर इन्फ्लुएंजा, कोविड-19, आरएसवी और अन्य श्वसन संक्रमणों की जांच पर जोर दिया जाएगा।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने कीटाणुओं को प्राथमिकता के अलग-अलग स्तरों 1ए, 1बी, 2 और 3 जैसी प्राथमिकताओं में बांटा है। इनमें 1ए श्रेणी के संक्रमणों की पहचान इलाज शुरू करने से पहले महत्वपूर्ण मानी गई है, जबकि अन्य श्रेणियों में कम आम और दुर्लभ रोगजनक शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की जांच-आधारित व्यवस्था से अनावश्यक दवाओं और एंटीबायोटिक के इस्तेमाल को कम करने में मदद मिल सकती है तथा गंभीर संक्रमण की जल्द पहचान संभव होगी।
Source: Newsline Features And Press Agency, Agra



