संक्रमित रक्त और इंजेक्शन से हो रहा है हेपेटाइटिस

संक्रमित रक्त और इंजेक्शन से युवाओं में हेपेटाइटिस की बीमारी तेजी से दस्तक दे रही है। इसकी वजह से ही लिवर बीमार हो रहा है। साथ ही युवाओं में कार्य क्षमता भी घट रही है। समय पर एंडोस्कोपी से जांच और इलाज से इस बीमारी पर काबू किया जाना संभव है।
राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉक्टर सूर्य कमल वर्मा ने बताया कि हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी गंभीर वायरस संक्रमण हैं। इसमें लिवर को नुकसान पहुंचता है। यह संक्रमित रक्त चढ़वाने और संक्रमित इंजेक्शन लगवाने से होता है। इसमें लिवर में सूजन, सिरोसिस और कैंसर का खतरा भी बना रहता है। असुरक्षित यौन संबंधों से भी हेपेटाइटिस की बीमारी पनप रही है।
डॉक्टर वर्मा ने बताया कि हेपेटाइटिस क्लीनिक में 30,500 मरीजों की जांच में 2,486 में हेपेटाइटिस सी की पुष्टि हुई है। इसके अलावा 33,333 मरीजों की जांच करने पर 3,877 में हेपेटाइटिस की बीमारी मिली है। इसमें करीब 60 फीसद युवा हैं। वहीं हेपेटाइटिस ए दूषित पानी और दूषित भोजन से होता है। यह गंभीर नहीं है। बारिश के मौसम में हेपेटाइटिस ए होने की संभावना अधिक होती है।
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर प्रशांत गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत एसएन में जांच और इलाज की निशुल्क सुविधा है। घड़ी वाली बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर कमरा नंबर 52 में हेपेटाइटिस क्लिनिक संचालित हो रहा है। हेपेटाइटिस और लिवर के मरीज इलाज के लिए एसएन मेडिकल कॉलेज में आ सकते हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉक्टर सरोज सिंह ने बताया कि अगर लगातार थकान रहना, वजन कम होना, पेट व पैरों में सूजन आना, पेट में पानी भरना, लिवर के आकार में वृद्धि होना, त्वचा में खुजली होना, मानसिक भ्रम जैसे लक्षण दिखाई दें तो विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराना चाहिए। इलाज में देरी और लापरवाही जानलेवा हो सकती है।

Source: Newsline Features And Press Agency, Agra

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